12 वर्ष बाद राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान चोपता के भवन निर्माण का रास्ता साफ
चोपता-कुंडा दनकोट में प्रस्तावित भवन के लिए 0.99 हेक्टेयर वन भूमि की दी स्वीकृति
रुद्रप्रयाग: तल्लानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान चोपता के भवन निर्माण का रास्ता 12 वर्ष बाद साफ हो गया है। अब वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली ने चोपता-कुंडा दनकोट में प्रस्तावित भवन के लिए 0.99 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
वर्ष 2014 में चोपता में राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान की स्थापना की गई थी। संस्थान में सिविल ट्रेड की कक्षाओं का संचालन भी शुरू हो गया। हालांकि स्थायी भवन न होने के कारण वर्तमान में संस्थान किराए के छह कमरों में संचालित किया जा रहा है। संस्थान की स्थापना के बाद चोपता क्षेत्र के कुंडा दनकोट में भवन निर्माण के लिए करीब दो हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया था। भूमि का आंकलन तैयार कर शासन को भेजा गया, जिसके बाद भवन निर्माण के लिए करीब तीन करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली थी।
बजट स्वीकृत होने और निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम को भवन निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। अप्रैल 2015 में निर्माण कार्य शुरू किया गया। इस दौरान भवन के लिए लोहे के पिलर खड़े किए गए और करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से भवन का ढांचा भी तैयार किया गया। इसी बीच केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। वन विभाग की ओर से आपत्ति जताई गई कि भवन निर्माण के लिए चयनित भूमि संस्थान के नाम विधिवत हस्तांतरित नहीं हुई है। इसके बाद निर्माण
कार्य पूरी तरह रुक गया और ढांचा भी वर्षों तक अधूरा पड़ा रहा।
अब वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से 0.99 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी कार्य के लिए हस्तांतरित करने की अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की राह खुल गई है। स्वीकृति मिलने के बाद अब वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 28.30 लाख रुपये की धनराशि राजकीय पॉलिटेक्निक को अवमुक्त करने का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है।
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि वन भूमि की स्वीकृति मिलने के बाद राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान चोपता के भवन निर्माण के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कहा कि यह केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के सपनों, शिक्षा के अवसरों और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।
