अंडे दानी में ठहरा गर्भ, डॉक्टर ने बचाई महिला की जान

रिपोर्ट : कुलदीप राणा आजाद / रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग के जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने एक महिला की जान बचाने में सफलता हासिल की है। नेपाल मूल की यह महिला केदारघाटी में अपने पति के साथ मजदूरी करती है। शादी के करीब दस साल बाद जब गर्भ ठहरा तो परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन जांच में पता चला कि गर्भाशय की बजाय अंडे दानी में गर्भ ठहर गया है। 28 सितंबर को महिला की हालत अचानक बिगड़ी और अंडे दानी फटने से पेट में रक्तस्राव शुरू हो गया। गंभीर स्थिति में पहुंची महिला का डॉक्टर संजीव कटारा और उनकी टीम ने तत्काल ऑपरेशन कर सफल उपचार किया।
दस साल से संतान की उम्मीद लगाए यह परिवार करीब ढाई महीने पहले जब गर्भ ठहरने की जानकारी मिली, तो वर्षों का इंतजार खुशियों में बदल गया। लेकिन जांच में सामने आई एक असामान्य स्थिति ने परिवार की चिंता बढ़ा दी। अल्ट्रासाउंड में पता चला कि गर्भाशय की बजाय गर्भ अंडे दानी में ठहरा है। अंडे दानी में भ्रूण के विकास के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण महिला को लगातार दर्द हो रहा था। 28 सितंबर को दर्द अचानक असहनीय हो गया। पति महिला को नारायणकोटी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया।
जिला अस्पताल में डॉ. संजीव कटारा ने महिला की जांच और अल्ट्रासाउंड किया। रिपोर्ट में सामने आया कि अंडाशय फट चुका था और पेट के भीतर बड़ी मात्रा में रक्त जमा हो रहा था। स्थिति गंभीर थी और समय बेहद कम। महिला को दूसरे अस्पताल रेफर करने के बजाय डॉ. कटारा ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया। उनकी टीम ने बिना समय गंवाए सर्जरी शुरू की। चिकित्सकीय टीम के प्रयास से ऑपरेशन सफल रहा और महिला की जान बचा ली गई। फिलहाल महिला खतरे से बाहर है।
रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच किया गया यह ऑपरेशन इसलिए भी अहम है, क्योंकि महिला की हालत लगातार बिगड़ रही थी और उपचार में देरी जानलेवा साबित हो सकती थी। मरीज के तीमारदार कहते हैं डॉक्टर और उनकी टीम ने समय पर इलाज कर महिला की जान बचाई। इस मुश्किल समय में उन्होंने हमारा बहुत साथ दिया। हम उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं।
दस साल के इंतजार के बाद मिली मातृत्व की उम्मीद… और फिर अचानक जिंदगी पर मंडराता खतरा। लेकिन समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय और टीम के प्रयासों ने महिला की जान बचा ली।
