सेवानिवृत्ति पर त्रियुगीनारायण में दर्शन लाल गैरोला जी का भव्य अभिनंदन

रुद्रप्रयाग। पवित्र अग्निकुंड और शिव-पार्वती के विवाह स्थल के रूप में विख्यात त्रियुगीनारायण की भूमि आज एक ऐसे व्यक्तित्व के सम्मान में भावुक नजर आई, जिसने अपना पूरा जीवन समाज, संस्कृति और लोक-सेवा को समर्पित कर दिया। जल विद्युत निगम में 34 वर्षों की शानदार और बेदाग सेवाएं देने के बाद, गाँव के दर्शन लाल गैरोला जी अपनी राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए। इस अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह में स्थानीय जनता और प्रबुद्ध जनों ने उन्हें एक ‘संवेदनशील इंसान’ और ‘हिमालय का सच्चा प्रहरी’ बताकर सम्मानित किया

गैरोला जी ने जल विद्युत निगम में तीन दशक से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दीं, लेकिन उनकी पहचान केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रही। वे सदैव एक जन-सरोकारी व्यक्ति रहे। विदाई समारोह में उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह थी कि उन्होंने कागजों से ज्यादा लोगों के दिलों पर राज किया है। स्थानीय वक्ताओं ने कहा कि गैरोला जी ने पद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को हमेशा सर्वोपरि रखा।

दर्शन लाल गैरोला जी का व्यक्तित्व बहुआयामी रहा है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने जन मोर्चा जैसे प्रतिष्ठित अखबार में सह-संपादक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई और अनिकेत अखबार के माध्यम से जनमानस की आवाज को मुखर किया। वे केवल समाचार नहीं लिखते थे, बल्कि वे समाज की पीड़ा और उत्तराखंड की अस्मिता को शब्दों में पिरोते थे। उनकी कलम की ताकत का लोहा तब भी माना गया जब लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी जी के स्वर और गैरोला जी के शब्दों ने मिलकर एक कालजयी रचना को जन्म दिया। प्रसिद्ध गीत “हिमवंत देश होला त्रियुगीनारायण” उन्हीं की लेखनी का प्रतिफल है, जो आज भी हर उत्तराखंडी के हृदय में अपनी जन्मभूमि के प्रति गर्व का संचार करता है।

गैरोला जी के जीवन का सबसे साहसिक अध्याय 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान लिखा गया। जब सोनप्रयाग में उफनती मंदाकिनी सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा थी, तब गैरोला जी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए वैकल्पिक पुल निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल राह दिखाई, बल्कि दर्जनों यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन दिया। इसके अलावा, वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी सक्रिय रहे और समाज को कुरीतियों से बचाने के लिए ‘शराब बंदी आंदोलन’ में प्रमुखता से शामिल रहे।

समारोह के दौरान स्थानीय जनता ने उन्हें शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उपस्थित लोगों ने उनके आगामी स्वास्थ्यप्रद और सुखद जीवन की मंगलकामना की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा दर्शन लाल जी जैसे व्यक्ति कभी सेवानिवृत्त नहीं होते; वे केवल एक जिम्मेदारी से मुक्त होकर समाज की बड़ी सेवा के लिए उपलब्ध होते हैं। इस भावुक क्षण में गैरोला जी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे आगे भी त्रियुगीनारायण और उत्तराखंड की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे।

युवा नेता मोहित डिमरी ने इस अवसर पर दर्शन लाल गैरोला जी का सम्मान करते हुए कहा ​”दर्शन लाल गैरोला जी जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए एक जीवंत प्रेरणापुंज हैं। उन्होंने न केवल जल विद्युत निगम में 34 वर्षों तक अपनी निष्ठावान सेवाएं दीं, बल्कि पत्रकारिता, राज्य आंदोलन और जन-सरोकारों के माध्यम से सदैव उत्तराखंड की अस्मिता की रक्षा की है। 2013 की आपदा में उनके द्वारा किया गया साहसपूर्ण कार्य और ‘हिमवंत देश होला त्रियुगीनारायण’ जैसे कालजयी गीतों के माध्यम से हमारी संस्कृति को संजोना, उनके विराट व्यक्तित्व को दर्शाता है। उनके मार्गदर्शन की समाज को भविष्य में भी उतनी ही आवश्यकता रहेगी।”

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