सौ वसंतों का साक्षी बना क्वीली गांव, 151 किलो गुलाबों की वर्षा में नहाया गुरु का सम्मान


कुलदीप राणा आजाद

रुद्रप्रयाग। समय की लंबी यात्रा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल उम्र नहीं जीते, बल्कि पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की अमिट इबारत लिख जाते हैं। अगस्त्यमुनि विकासखंड के क्वीली गांव में ऐसा ही एक भावुक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब शिक्षा, संस्कार और समाजसेवा की जीवित मिसाल पूर्णानंद पुरोहित ने अपने जीवन के सौ वर्ष पूर्ण किए। इस अवसर पर पूरा गांव मानो अपने गुरु, मार्गदर्शक और अभिभावक के सम्मान में उमड़ पड़ा।


श्री नंदा नाभ्या सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य शताब्दी एवं सम्मान समारोह में जब शतायु पूर्णानंद पुरोहित पर 151 किलो गुलाब के फूलों की वर्षा हुई, तो वातावरण श्रद्धा, सम्मान और भावनाओं से सराबोर हो उठा। गुलाब की पंखुड़ियों के बीच मुस्कुराते हुए यह शतायु व्यक्तित्व मानो एक शताब्दी के अनुभव, संघर्ष और सेवा की कहानी स्वयं कह रहा था। पूर्णानंद पुरोहित ने अपने जीवन का स्वर्णिम काल एक शिक्षक के रूप में समाज को समर्पित किया। उन्होंने न केवल बच्चों को अक्षरज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन के संस्कार भी सिखाए।सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जीवन समाजहित, लोकसेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिए समर्पित रहा। यही कारण है कि आज भी क्षेत्र के लोग उन्हें केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक प्रेरणा-पुंज के रूप में देखते हैं।


समारोह के दौरान स्थानीय महिलाओं और बालिकाओं ने लोकसंस्कृति की सुंदर छटा बिखेरी। गढ़वाली लोकगीतों की मधुर धुनें, कविता पाठ की भावपूर्ण प्रस्तुतियां और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों ने आयोजन को सामाजिक सरोकारों से जोड़ दिया। हर प्रस्तुति मानो उस पीढ़ी को नमन कर रही थी जिसने अपने जीवन से समाज को दिशा देने का कार्य किया।
सौ वसंत पार कर चुके पूर्णानंद पुरोहित ने भी युवाओं को एकता, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा का संदेश दिया। उनके शब्दों में जीवन का अनुभव था, संघर्षों की तपिश थी और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का उजाला।


आयोजकों ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती जीवनशैली और रसायनों से भरे खानपान के दौर में जहां इंसान की उम्र और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं, वहीं पूर्णानंद पुरोहित का सौ वर्ष की आयु में भी सक्रिय, सजग और समाज के प्रति समर्पित रहना किसी प्रेरणादायक चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री भरत सिंह चौधरी भी उनके शिष्य रहे हैं। गुरु के प्रति सम्मान और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर ही “एक पेड़ गुरु के नाम” जैसी मुहिम को नई ऊर्जा मिली।
इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 101 महिलाओं का सम्मान भी किया गया। यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का था जो समाज को आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।


क्वीली गांव में आयोजित यह समारोह केवल एक जन्मदिन नहीं था, बल्कि एक शताब्दी की साधना, सेवा, संस्कार और समर्पण को नमन करने का अवसर था। गुलाब की पंखुड़ियों से सजा यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश दे गया कि सच्चा जीवन वही है, जो अपने लिए नहीं, समाज के लिए जिया जाए।

Share