करोड़ों के सिग्नल, शून्य फायदा…सड़कों पर क्यों जल रहा है सरकारी पैसा? प्रशासन कब उठाएगा सक्रिय कदम

हल्द्वानी कुमाऊं का एक प्रमुख और प्रशासनिक केंद्र होने के बावजूद अपनी ट्रैफिक व्यवस्था में गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर में लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़े हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे जनता के पैसे की बर्बादी हुई है। या

हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा महानगर है। अधिकारियों से लेकर मंत्री, सांसद और विधायकों के आवास भी यहां हैं। कुमाऊं आयुक्त, आईजी पुलिस और जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय भी यहीं हैं। अधिकतर समय यह जिम्मेदार अधिकारी भी यहीं बैठते हैं। समय-समय पर मुख्यमंत्री व मंत्रियों के काफिले इस महानगर की सड़कों से गुजरते हैं। विडंबना है कि शहर में यातायात व्यवस्था बनाने के लिए लगाए ट्रैफिक सिग्नल शोपीस बने हुए हैं। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था आज भी यातायात पुलिस तो कहीं होमगार्ड जवानों के भरोसे संचालित हो रही है। कई बार लोगों ने भी प्रशासन के सामने इस समस्या को उठाया लेकिन इसके समाधान के लिए आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया। आम जनता के पैसे की बर्बादी कर शो-पीस बनीं ट्रैफिक लाइटों पर पेश है पड़ताल

90 लाख रुपये किए गए खर्च
वर्ष 2020-21 में 90 लाख रुपये खर्च कर शहर के 13 चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थीं। इनमें आईटीआई तिराहा, टीपीनगर पर अर्बन अल्मोड़ा बैंक के समीप, सेंट्रल हॉस्पिटल के पास, कुसुमखेड़ा, पीलीकोठी, लालडांठ, नरीमन चौराहा व डिग्री कॉलेज के समीप आदि चौराहे थे। तब इसके संचालन का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा गया। अफसरों ने इस कार्य में लगभग एक करोड़ रुपये फूंक डाले लेकिन सभी जगहों पर ट्रैफिक लाइटें शो-पीस बनी हुई हैं। पिछले साल सड़क चौड़ीकरण के दौरान कुछ चौराहों की लाइटें हटा दी गईं थी जो दोबारा नहीं लगाई गई हैं।

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