राजकीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों में उबाल, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी



केदारखण्ड एक्सप्रेस न्यूज़। प्रदेश के राजकीय जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाओं में शिक्षा विभाग की नीतियों को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। विद्यालयों के मर्जर, शिक्षकों की पदोन्नति, संसाधनों की कमी तथा लगातार बढ़ते प्रशासनिक दबाव के विरोध में अब शिक्षक संगठन आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। विभिन्न जनपदों में बैठकों और विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया है, वहीं सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।


शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कई विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर विद्यालयों के मर्जर की प्रक्रिया ने शिक्षकों और अभिभावकों दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझे बिना फैसले ले रही है, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है।
हाल ही में आयोजित बैठकों में शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यदि विभाग ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजते हुए चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान न होने पर देहरादून में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
शिक्षकों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पहले ही विद्यालयों तक पहुंचना कठिन है। ऐसे में विद्यालयों के मर्जर से छात्र-छात्राओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे शिक्षा प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी। इसके अलावा कई विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है। शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि पहले विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक, भवन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, उसके बाद ही किसी प्रकार की नई व्यवस्था लागू की जाए।


शिक्षक नेताओं ने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के पक्षधर हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा और तानाशाहीपूर्ण निर्णयों के कारण अब आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने शिक्षकों और अभिभावकों की भावनाओं को नहीं समझा तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है।


वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और शिक्षकों की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि फिलहाल शिक्षक संगठनों का रुख काफी आक्रामक दिखाई दे रहा है।
अब सभी की निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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