कार्तिक स्वामी मंदिर क्षेत्र में स्थानीय लोगों को बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा प्रवेश शुल्क

रुद्रप्रयाग। भगवान कार्तिक स्वामी के दर्शन के लिए जाने वाले रुद्रप्रयाग एवं चमोली जनपद के स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से पैदल मार्ग पर लिया जाने वाला प्रवेश शुल्क समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोगों में खुशी की लहर है। कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग का एक हिस्सा वन विभाग के अधीन होने के कारण यहां आने वाले यात्रियों से 50 रुपये तथा स्थानीय लोगों से 10 रुपये शुल्क वसूला जाता था। लंबे समय से स्थानीय निवासी इस शुल्क को समाप्त करने की मांग कर रहे थे।
रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के करीब 300 से अधिक गांव कार्तिक स्वामी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना था कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस मंदिर में दर्शन के लिए भी स्थानीय लोगों से शुल्क लेना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर कार्तिक स्वामी मंदिर समिति ने भी कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वन विभाग और प्रशासन के बीच हुई सकारात्मक वार्ता के बाद स्थानीय लोगों से शुल्क न लेने का निर्णय लिया गया है। प्रभागीय वन अधिकारी रजत सुमन ने बताया कि रुद्रप्रयाग जनपद तथा चमोली जिले की पोखरी तहसील के निवासियों को अब इस शुल्क से मुक्त रखा जाएगा। विभाग द्वारा इस निर्णय को शीघ्र लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्षेत्र के लोगों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे जनभावनाओं और धार्मिक आस्था का सम्मान बताया है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इससे कार्तिक स्वामी धाम के प्रति लोगों का जुड़ाव और अधिक मजबूत होगा तथा धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
300 से अधिक गांवों को मिलेगा लाभ
कार्तिक स्वामी मंदिर क्षेत्र से रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के 300 से अधिक गांव जुड़े हुए हैं। शुल्क समाप्त होने से हजारों स्थानीय श्रद्धालु सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे और बिना किसी शुल्क के भगवान कार्तिक स्वामी के दर्शन कर सकेंगे।
